2 अक्टूबर 2025 की शाम को देहरादून के जौनसार-बावर क्षेत्र में दशहरे पर रावण दहन की बजाय एक अनूठी प्रथा ने ध्यान खींचा। इस क्षेत्र के दो गांवों, जैसे लखवाड़ और कोटी-ब्राह्मण, के बीच परंपरागत ‘युद्ध’ का आयोजन हुआ, जो एक प्रतीकात्मक खेल है। इसमें ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में मिट्टी या नरम पत्थर फेंककर ‘राम-रावण युद्ध’ का प्रतीकात्मक प्रदर्शन करते हैं। भारी बारिश के बावजूद सैकड़ों लोग शामिल हुए, और आयोजन उत्साहपूर्ण रहा। यह प्रथा सैकड़ों साल पुरानी है, जो सामुदायिक एकता और सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाती है। #JaunsarBawar #Dussehra2025 #UttarakhandTradition
X पर इस ‘युद्ध’ की तस्वीरें और वीडियो वायरल हुए, जहां यूजर्स ने इसे उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत का अनूठा उदाहरण बताया। एक यूजर ने लिखा, “बारिश में भी जौनसार-बावर का उत्साह देखते बनता है!” आयोजन के बाद ग्रामीण एक साथ भोजन और नृत्य में शामिल हुए, जो सामाजिक एकता का प्रतीक है। कुछ यूजर्स ने इसे पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रचारित करने की मांग की, हालांकि बारिश के कारण कीचड़ ने थोड़ी चुनौती पेश की। स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए, जिससे कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। #SocialMediaViral #UttarakhandCulture #DussehraCelebration
यह प्रथा न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि जौनसार-बावर की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत करती है। स्थानीय इतिहासकार इसे महाभारत और रामायण की कहानियों से प्रेरित मानते हैं। पर्यटन विभाग इसे वैश्विक स्तर पर प्रचारित करने की योजना बना रहा है, ताकि अधिक लोग इस अनूठे उत्सव को देख सकें। बारिश के बावजूद आयोजन की लोकप्रियता ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया, क्योंकि पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हुई। अगले दशहरे पर इस जीवंत प्रथा को देखने के लिए जौनसार-बावर की यात्रा जरूर करें। #CulturalHeritage #UttarakhandTourism #JaunsarBawarYudh