देहरादून: आजाद हिंद फौज के अमर वीर शहीद केसरी चंद की 106वीं जयंती पर देहरादून के गांधी पार्क में भावभीनी श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। स्वतंत्रता सेनानियों, पूर्व सैनिकों, नगर निगम अधिकारियों और आम नागरिकों ने शहीद की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में “वंदे मातरम्” और “भारत माता की जय” के नारे गूंजे।
शहीद केसरी चंद: जीवन परिचय
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| जन्म | 1 नवंबर 1920, ग्राम पटटी, टिहरी गढ़वाल (तत्कालीन संयुक्त प्रांत) |
| पिता | स्व. श्री दौलत राम |
| शिक्षा | प्रारंभिक शिक्षा गांव में, बाद में देहरादून में |
| सेना भर्ती | 1939 में ब्रिटिश इंडियन आर्मी में भर्ती, रॉयल गढ़वाल राइफल्स |
| आजाद हिंद फौज में शामिल | 1942 में सिंगापुर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस से प्रेरित होकर ब्रिटिश सेना छोड़ी |
| योगदान | इंटेलिजेंस और गोरिल्ला युद्ध में सक्रिय, बर्मा फ्रंट पर लड़ाई |
| शहादत | 1945 में ब्रिटिश कोर्ट मार्शल द्वारा फांसी, रंगून सेंट्रल जेल |
“मैं मरकर भी अमर रहूँगा, क्योंकि मैंने देश के लिए जीया।”
— शहीद केसरी चंद (अंतिम पत्र से उद्धृत)
माल्यार्पण समारोह: प्रमुख बिंदु
- समय: सुबह 10:00 बजे
- मुख्य अतिथि:
- मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूरी (पूर्व सीएम उत्तराखंड)
- कर्नल (सेवानिवृत्त) अजय कोठियाल
- देहरादून नगर निगम महापौर सुनील उनियाल ‘गामा’
- आयोजक: शहीद केसरी चंद स्मृति समिति, देहरादून
- विशेष:
- 2 मिनट का मौन
- शहीद के परिजनों का सम्मान (पौत्री श्रीमती राधा देवी उपस्थित)
- स्कूली बच्चों द्वारा देशभक्ति गीत
शहीद की विरासत
- पहचान: आजाद हिंद फौज के पहले उत्तराखंडी शहीद
- सम्मान:
- गांधी पार्क में प्रतिमा स्थापना (1985)
- केसरी चंद राजकीय इंटर कॉलेज, पटटी का नामकरण
- उत्तराखंड सरकार द्वारा तमgha-ए-वीरता (पोस्टह्यूमस)
- प्रेरणा: हर साल 1 नवंबर को “वीरता दिवस” के रूप में मनाने की मांग
उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों के उद्धरण
“केसरी चंद ने दिखाया कि पहाड़ का जवान देश के लिए जान दे सकता है। उनकी शहादत हमें कर्तव्य पथ पर चलने की प्रेरणा देती है।”
— मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी“आज के युवाओं को नेताजी और केसरी चंद जैसे वीरों की कहानियाँ पढ़ानी चाहिए।”
— महापौर सुनील उनियाल ‘गामा’
भविष्य की योजनाएँ
- स्मृति संग्रहालय: पटटी गांव में शहीद के नाम पर संग्रहालय प्रस्तावित।
- वार्षिक व्याख्यान: दून लाइब्रेरी में “केसरी चंद व्याख्यान माला” शुरू करने की घोषणा।
- डिजिटल आर्काइव: उनके पत्र, फोटो और दस्तावेज़ ऑनलाइन उपलब्ध कराने की योजना।