उत्तराखंड के बागेश्वर जिला अंतर्गत रैथल और घिरौली गांवों में ‘मेरा रेशम, मेरा अभिमान’ पहल के तहत रेशम किसानों के लिए एक विशेष कार्यशाला और प्रौद्योगिकी प्रदर्शन कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य रेशम कीट पालन से जुड़े किसानों को आधुनिक तकनीकों, शोध संस्थानों के नए नवाचारों से जोड़ना और उनकी व्यावहारिक समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान प्रदान करना था।
केंद्रीय रेशम बोर्ड और राज्य रेशम विभाग, उत्तराखंड के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने किसानों के साथ सीधे संवाद किया।


आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन और विशेषज्ञों का मार्गदर्शन कार्यक्रम के दौरान अनुसंधान संस्थानों द्वारा विकसित रेशम उत्पादन की नवीनतम तकनीकों का लाइव प्रदर्शन किया गया। वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि कैसे वे उपलब्ध संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और आधुनिक तरीकों को अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं।

इस अवसर पर उपस्थित विभागीय अधिकारियों और वैज्ञानिकों में शामिल थे:
- डॉ. विक्रम कुमार (वैज्ञानिक)
- श्री के. एस. चौहान (वरिष्ठ तकनीकी सहायक)
- श्री बृजेश रतूड़ी (जिला नोडल अधिकारी)
- श्री कमलेश कुमार (ब्लॉक नोडल अधिकारी)
स्थानीय समस्याओं पर चर्चा और समाधान क्षेत्रीय ग्राम प्रधानों ने भी इस कार्यशाला में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने स्थानीय परिस्थितियों, मौसम संबंधी चुनौतियों और किसानों की व्यावहारिक जरूरतों को अधिकारियों के सामने रखा। वैज्ञानिकों ने किसानों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के तकनीकी और सरल समाधान बताए।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के अभियानों का अंतिम लक्ष्य “लैब से लैंड तक” (अनुसंधान से खेत तक) नई तकनीकों को पहुँचाना है, ताकि उत्तराखंड में रेशम उत्पादन अधिक टिकाऊ, प्रभावी और लाभदायक व्यवसाय बन सके। स्थानीय रेशम उत्पादकों ने इस प्रशिक्षण को बेहद उपयोगी बताया और कार्यक्रम में भारी उत्साह दिखाया।





