
देहरादून (9 अप्रैल 2026): उत्तराखंड शिक्षा विभाग ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी नौकरी हथियाने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए एक बड़ी कार्रवाई की है। जिले के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय में तैनात शिक्षिका को फर्जी जाति प्रमाणपत्र (Fake Caste Certificate) के आधार पर नौकरी पाने का दोषी पाए जाने के बाद सेवा से बर्खास्त (Dismissed) कर दिया गया है।
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मामले का खुलासा: 15 साल बाद पकड़ी गई चोरी
- वर्षों से कार्यरत: आरोपी शिक्षिका पिछले लगभग 15 वर्षों से शिक्षा विभाग में कार्यरत थी। उन्होंने आरक्षित वर्ग (Reserved Category) के कोटे का लाभ उठाकर सरकारी शिक्षक के पद पर नियुक्ति प्राप्त की थी।
- शिकायत और जांच: विभाग को एक गुप्त शिकायत मिली थी कि शिक्षिका ने नियुक्ति के समय जो जाति प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया था, वह कूटरचित (Forged) है। इसके बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर एक विशेष जांच समिति (SIT) का गठन किया गया।
- तहसील की रिपोर्ट: जांच के दौरान संबंधित तहसील से रिकॉर्ड खंगाला गया, जहाँ से यह स्पष्ट हुआ कि उस नंबर का कोई प्रमाणपत्र कभी जारी ही नहीं हुआ था। शिक्षिका मूल रूप से सामान्य श्रेणी से ताल्लुक रखती थीं, लेकिन उन्होंने फर्जी तरीके से ओबीसी/एसटी प्रमाणपत्र बनवाया था।
कड़ी कार्रवाई: केवल बर्खास्तगी ही नहीं, रिकवरी भी होगी
- तत्काल बर्खास्तगी: शिक्षा निदेशक और मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEO) ने जांच रिपोर्ट के आधार पर शिक्षिका की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं।
- वेतन की रिकवरी: विभाग अब तक शिक्षिका को दिए गए वेतन और भत्तों की गणना कर रहा है। नियमानुसार, धोखाधड़ी से प्राप्त की गई पूरी धनराशि की रिकवरी (Recovery) भू-राजस्व की भांति की जाएगी।
- कानूनी कार्रवाई: विभाग ने संबंधित थाने में शिक्षिका के खिलाफ धोखाधड़ी (IPC/BNS की संबंधित धाराओं) और दस्तावेजों में हेराफेरी का मुकदमा दर्ज करने की संस्तुति भी की है।
प्रशासन का संदेश
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई उन सभी के लिए एक चेतावनी है जो गलत तरीके से सरकारी सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं। विभाग अब पुराने रिकॉर्ड्स का भी रैंडम वेरिफिकेशन (Random Verification) शुरू करने की योजना बना रहा है ताकि योग्य उम्मीदवारों के हक पर डाका डालने वालों को बाहर किया जा सके।
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