हरिद्वार और ऋषिकेश में सीवर नेटवर्क को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री ने ₹100 करोड़ मंजूर किए हैं। यह कदम दोनों शहरों में बढ़ते शहरीकरण और पर्यटन के दबाव को देखते हुए उठाया गया है। इस परियोजना का उद्देश्य मौजूदा सीवर लाइनों की क्षमता बढ़ाना और नए क्षेत्रों को नेटवर्क से जोड़ना है, ताकि गंगा नदी में प्रदूषण को कम किया जा सके और स्वच्छता सुनिश्चित की जा सके। यह परियोजना नमामि गंगे मिशन का भी एक हिस्सा है।
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यह फंडिंग दोनों शहरों के लिए एक बड़ी राहत है, क्योंकि पिछले कुछ सालों से यहां सीवर ओवरफ्लो और जलभराव की समस्याएँ आम हो गई थीं, खासकर मानसून के दौरान। इस राशि का उपयोग पुरानी और क्षतिग्रस्त सीवर लाइनों की मरम्मत, नई लाइनों को बिछाने और पंपिंग स्टेशनों को अपग्रेड करने में किया जाएगा। इसका सीधा लाभ स्थानीय निवासियों और हर साल आने वाले लाखों तीर्थयात्रियों को मिलेगा, जिससे स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
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इस परियोजना के तहत, हरिद्वार में जगजीतपुर और सती घाट जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जहाँ सीवर ओवरफ्लो की समस्या गंभीर है। वहीं, ऋषिकेश में भी लक्ष्मण झूला और राम झूला जैसे व्यस्त इलाकों में सीवर नेटवर्क को सुधारा जाएगा। सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल शहरी बुनियादी ढांचा मजबूत होगा, बल्कि गंगा नदी को स्वच्छ रखने के प्रयासों में भी मदद मिलेगी, जो कि धार्मिक और पर्यावरणीय दोनों दृष्टियों से बेहद महत्वपूर्ण है।
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