देहरादून। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य के आयुष सचिव (AYUSH Secretary) को आदेश दिया है कि वह उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय (Uttarakhand Ayurved University) में नियुक्तियों पर लगे प्रतिबंध की समीक्षा करें। अदालत ने कहा कि लंबे समय से विश्वविद्यालय में नई नियुक्तियां न होने के कारण शिक्षण कार्य और शोध गतिविधियाँ प्रभावित हो रही हैं।
मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए सरकार से पूछा कि नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगाने का कारण क्या है, जबकि विश्वविद्यालय में कई विभागों में पद खाली हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि शिक्षा और अनुसंधान से जुड़े संस्थानों में स्टाफ की कमी छात्रों के हित में नहीं है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि विश्वविद्यालय में कई वर्षों से नियमित नियुक्तियाँ नहीं हुई हैं, जिससे शिक्षकों और कर्मचारियों पर कार्यभार बढ़ गया है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि समय रहते भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो कई विभागों को बंद करना पड़ सकता है।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से चार सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा है और उम्मीद जताई है कि सरकार विश्वविद्यालय के विकास और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेगी।
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