उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा है कि राज्य सूचना आयोग (RTI Panel) को जिला मजिस्ट्रेट (DM) को जांच का आदेश देने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है।
यह फैसला हरिद्वार जिले से जुड़ी एक पुरानी याचिका पर सुनाया गया, जिसमें सूचना आयोग द्वारा डीएम हरिद्वार को जांच करने का आदेश दिया गया था। न्यायालय ने इस आदेश को अधिकार क्षेत्र से बाहर (beyond jurisdiction) मानते हुए रद्द (quash) कर दिया।
मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व वाली पीठ ने अपने निर्णय में कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act, 2005) के तहत आयोग केवल सूचना उपलब्ध कराने या सूचना अधिकारियों पर दंडात्मक कार्यवाही करने का अधिकार रखता है, जांच का आदेश देने का नहीं।
अदालत ने कहा कि यदि किसी मामले में जांच की आवश्यकता है तो वह प्रशासनिक या न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही की जानी चाहिए, न कि सूचना आयोग के आदेश पर।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में RTI की सीमाओं और अधिकार क्षेत्र की स्पष्टता के लिए एक महत्वपूर्ण नज़ीर साबित होगा।
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