देहरादून। उत्तराखंड वन विकास निगम (UKFDC) एक बड़े वित्तीय घोटाले को लेकर सुर्खियों में है। निगम में कथित तौर पर बिना किसी सरकारी अनुमति के 40 आउटसोर्स कुक (रसोइए) की तैनाती का खुलासा हुआ है, जिनमें से अधिकांश (करीब 35) को निगम के उच्चाधिकारियों ने अपने निजी आवासों पर घरेलू काम के लिए लगा रखा है।
जाँच में सामने आया है कि वन निगम के खजाने पर इन कुक का भारी बोझ पड़ रहा है। प्रत्येक कुक के लिए आउटसोर्सिंग एजेंसी को हर महीने लगभग ₹17,000 का भारी-भरकम मानदेय दिया जा रहा है, जबकि ये लोग सरकारी काम के बजाय अधिकारियों की निजी सेवा में लगे हुए हैं।
मुख्य खुलासे:
- बिना अनुमति तैनाती: निगम के शीर्ष अधिकारियों ने इस तरह की आउटसोर्सिंग के लिए शासन या सक्षम प्राधिकारी से कोई मंजूरी नहीं ली थी।
- निजी इस्तेमाल: 40 में से लगभग 35 कुक केवल अधिकारियों के घरों पर तैनात थे, जो सरकारी पैसे का दुरुपयोग और पद का दुरुपयोग माना जा रहा है।
- रिश्तेदारों के नाम पर मानदेय: कुछ कर्मचारी नेताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि कई अधिकारियों ने आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से अपने रिश्तेदारों या जान-पहचान वालों के नाम पर यह तैनाती दिखाकर मानदेय निकाला है।
मामला शासन के संज्ञान में आने के बाद गंभीर नाराजगी जताई गई है। शासन ने तत्काल प्रभाव से निगम के प्रबंध निदेशक (MD) को निर्देश दिए हैं कि सभी 40 आउटसोर्स कुक की सेवाएं समाप्त की जाएं और पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू की जाए ताकि जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जा सके। यह घोटाला सरकारी खजाने पर अधिकारियों के ‘शाही ठाठ’ के भारी बोझ को उजागर करता है।
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