28 अक्टूबर 1956 – भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम उठाया। ट्रॉम्बे, मुंबई में स्थित भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) में भारत का पहला परमाणु रिएक्टर ‘अप्सरा’ सफलतापूर्वक क्रिटिकल (चेन रिएक्शन शुरू) हो गया।
यह रिएक्टर 1 मेगावाट थर्मल पावर का था और स्विमिंग पूल टाइप डिज़ाइन पर आधारित, जिसमें यूरेनियम ईंधन और भारी पानी (हैवी वॉटर) का उपयोग किया गया। इसे ब्रिटेन की मदद से बनाया गया था, लेकिन डिज़ाइन और संचालन पूरी तरह भारतीय वैज्ञानिकों के नेतृत्व में हुआ।
डॉ. होमी जहांगीर भाभा (BARC के संस्थापक) ने इसे “भारत की परमाणु स्वतंत्रता की नींव” कहा। अप्सरा ने न सिर्फ रेडियोआइसोटोप्स का उत्पादन शुरू किया (जो चिकित्सा, कृषि और उद्योग में काम आए), बल्कि भारतीय वैज्ञानिकों को परमाणु तकनीक में आत्मनिर्भरता की दिशा भी दिखाई।
रोचक तथ्य:
- अप्सरा का नाम हिंदू पौराणिक कथाओं की अप्सराओं से प्रेरित था।
- यह एशिया का पहला परमाणु रिएक्टर था।
- 2009 में इसे अपग्रेड कर अप्सरा-यू (Apsara-U) बनाया गया, जो अब 2 MW का है।
आज भी BARC परिसर में अप्सरा सुरक्षित रूप से संरक्षित है – एक राष्ट्रीय स्मारक के रूप में।