चमोली, उत्तराखंड: उत्तराखंड के चमोली जिले में धौली गंगा नदी पर एक बार फिर कृत्रिम झील (Artificial Lake) के बनने से हड़कंप मच गया है। तपोवन क्षेत्र के ऊपर नदी के मार्ग में यह झील लगातार बड़ी हो रही है, जिसे विशेषज्ञों ने एक ‘टाइम बम’ बताया है। झील के अचानक फटने (Outburst) पर वर्ष 2021 की रैणी आपदा जैसी स्थिति पैदा होने की आशंका है। विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बाद स्थानीय प्रशासन और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीमों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
क्या है कृत्रिम झील का खतरा?
यह कृत्रिम झील, तपोवन क्षेत्र से लगभग 14 किलोमीटर ऊपर, धौली गंगा नदी के ग्लेशियर स्रोतों के पास, भूस्खलन (Landslide) और मलबे के जमा होने के कारण बनी है।
- बढ़ता आकार: मानसून की समाप्ति के बावजूद, झील का आकार लगातार बढ़ रहा है।
- विशेषज्ञों की चेतावनी: भूवैज्ञानिकों और आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि मलबे का यह अस्थायी बांध (Temporary Dam) टूटता है, तो भारी मात्रा में पानी, कीचड़ और मलबा तेजी से नीचे की ओर आएगा।
- लक्ष्य: इस झील का सीधा निशाना तपोवन-विष्णुगाड जलविद्युत परियोजना और नदी के किनारे की बस्तियाँ हो सकती हैं, जैसा कि 7 फरवरी 2021 को रैणी आपदा में हुआ था।
प्रशासन की कार्रवाई और तैयारी
खतरे को भांपते हुए चमोली जिला प्रशासन ने तत्काल कदम उठाए हैं:
- SDRF तैनाती: नदी के किनारे बसे निचले इलाकों में SDRF की टीमें तैनात कर दी गई हैं। ये टीमें लगातार स्थिति पर निगरानी रख रही हैं और लोगों को खतरे के प्रति जागरूक कर रही हैं।
- वैज्ञानिक निगरानी: वर्मा कमेटी और अन्य वैज्ञानिक संस्थानों के विशेषज्ञों को तुरंत क्षेत्र का दौरा करने और झील की संरचना (Structure) का विस्तृत अध्ययन करने के निर्देश दिए गए हैं।
- चेतावनी प्रणाली: नदी किनारे के गांवों और संवेदनशील परियोजनाओं (जैसे ऋषिगंगा और तपोवन परियोजना) पर अलर्ट सिस्टम को सक्रिय कर दिया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत चेतावनी दी जा सके।
- निकासी योजना: संभावित बाढ़ के खतरे वाले क्षेत्रों के लिए निकासी योजना (Evacuation Plan) को अपडेट किया जा रहा है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वे 2021 की त्रासदी से सबक लेते हुए किसी भी जोखिम को नज़रअंदाज़ नहीं करेंगे। मौसम विभाग को भी अगले कुछ दिनों तक अलर्ट पर रहने को कहा गया है।
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