राजाजी टाइगर रिजर्व में बढ़ा प्लास्टिक प्रदूषण का खतरा: 46,800 मीटर क्षेत्र के सर्वे में मिला भारी कचरा, बाघों की फूड चेन पर मंडराया संकट
देहरादून। विश्व प्रसिद्ध राजाजी टाइगर रिजर्व में प्लास्टिक प्रदूषण को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के हालिया अध्ययन में सामने आया है कि संरक्षित वन क्षेत्र भी प्लास्टिक कचरे के संकट से अछूते नहीं हैं। पार्क के पर्यटक मार्गों पर किए गए 46,800 मीटर क्षेत्र के विस्तृत सर्वे में भारी मात्रा में प्लास्टिक और गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरा मिला है, जो वन्यजीवों और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। भारतीय वन्यजीव संस्थान के विज्ञानियों ने राजाजी टाइगर रिजर्व के विभिन्न रेंजों में मानव और व्यावसायिक गतिविधियों वाले क्षेत्रों की पहचान कर 17 लाइन ट्रांसेक्ट (लाइन सर्वे) बनाए। इस दौरान 46,800 मीटर के पर्यटक ट्रैकों और व्यावसायिक इलाकों का व्यवस्थित सर्वेक्षण किया गया। सर्वे में मिला कचरे का ब्योरा सर्वेक्षण के दौरान विज्ञानियों ने कुल 2,126 प्लास्टिक वस्तुएं, 92 धातु के टुकड़े, 58 कांच की वस्तुएं, 389 प्रोसेस्ड लकड़ी, 25 रबर सामग्री और 60 अन्य प्रकार के कचरे दर्ज किए। पान मसाला रैपर्स सर्वाधिक: अध्ययन में पाया गया कि व्यावसायिक गतिविधियों वाले क्षेत्रों में गुटखा और पान मसाला के रैपर सबसे अधिक घनत्व (लगभग 0.060 प्रति वर्ग मीटर) में मिले। खाद्य पदार्थों के रैपर्स दूसरे नंबर पर: चिप्स, बिस्किट और खाद्य पदार्थों के रैपर दूसरे स्थान पर (लगभग 0.033 प्रति वर्ग मीटर) रहे। खाद्य श्रृंखला और बाघों के लिए बड़ा संकट पर्यावरणविदों और विज्ञानियों के अनुसार, जंगलों में फेंका गया यह प्लास्टिक कचरा शाकाहारी जीवों (जैसे हिरण, सांभर और चीतल) द्वारा भोजन की तलाश में निगल लिया जाता है। जब ये वन्यजीव बाघ और तेंदुए जैसे हिंसक जीवों का शिकार बनते हैं, तो यह प्लास्टिक अप्रत्यक्ष रूप से शीर्ष शिकारियों की खाद्य श्रृंखला (Food Chain) में प्रवेश कर जाता है। इससे जानवरों के पाचन तंत्र के अवरुद्ध होने और उनकी मृत्यु होने का जोखिम काफी बढ़ जाता है। देहरादून जू की स्थिति बेहतर तुलना के लिए विज्ञानियों ने देहरादून जू (मालसी डियर पार्क) में भी 4 लाइन ट्रांसेक्ट बनाकर सर्वे किया। वहां केवल 67 प्लास्टिक वस्तुएं दर्ज की गईं, जिसका प्लास्टिक घनत्व 0.016 प्रति वर्ग मीटर रहा। राजाजी के मुकाबले देहरादून जू में बेहतर स्थिति का मुख्य कारण सख्त कचरा प्रबंधन और आगंतुकों के लिए लागू कड़े नियम बताए गए हैं। विज्ञानियों और वन विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि राजाजी टाइगर रिजर्व में प्लास्टिक के प्रवेश पर तत्काल प्रभाव से रोक नहीं लगाई गई और ठोस कचरा प्रबंधन नीतियां लागू नहीं की गईं, तो यह जैव विविधता के लिए अपूरणीय क्षति साबित हो सकता है।





