भारत निर्वाचन आयोग ने उत्तराखंड में पंजीकृत 11 गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (RUPPs) की मान्यता रद्द कर दी है। यह कार्रवाई इन दलों के लगातार निष्क्रिय रहने और पिछले छह वर्षों से लोकसभा या विधानसभा के किसी भी चुनाव में हिस्सा न लेने के कारण की गई है। इस कदम का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और निष्क्रिय दलों को सूची से हटाना है, जो अक्सर चुनावी लाभ या कर छूट जैसी सुविधाओं का दुरुपयोग करते हैं। इससे पहले भी चुनाव आयोग ने अगस्त में उत्तराखंड के छह राजनीतिक दलों की मान्यता रद्द की थी, जिसके बाद अब कुल 17 दलों को सूची से बाहर किया जा चुका है। #उत्तराखंड #चुनावआयोग #राजनीतिकदल #मान्यता_रद्द #RUPP
निष्क्रियता बनी मान्यता रद्द होने का कारण
जिन 11 दलों की मान्यता रद्द की गई है, उन्होंने 2019 के बाद से कोई भी चुनाव नहीं लड़ा। निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार, यदि कोई राजनीतिक दल लगातार छह वर्षों तक चुनावी प्रक्रिया में भाग नहीं लेता है, तो उसकी मान्यता रद्द की जा सकती है। इसके अलावा, इनमें से कई दलों के पंजीकृत पते पर भी कोई भौतिक कार्यालय नहीं पाया गया। आयोग ने इन दलों को अंतिम अपील का समय भी दिया था, लेकिन वे अपनी निष्क्रियता का कोई उचित कारण नहीं बता पाए। यह कार्रवाई चुनाव आयोग के उस राष्ट्रव्यापी अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत देश भर में 800 से अधिक निष्क्रिय दलों का पंजीकरण रद्द किया जा चुका है। #निष्क्रियदल #चुनावनियम #चुनावीप्रक्रिया #ECIAction
रद्द हुए दलों की सूची
जिन 11 दलों को सूची से बाहर किया गया है, उनमें ये दल शामिल हैं:
- भारत कौमी दल
- भारत परिवार पार्टी
- भारतीय मूल निवासी समाज पार्टी
- भारतीय सम्राट सुभाष सेना
- भारतीय अंत्योदय पार्टी
- भारतीय ग्राम नगर विकास पार्टी
- गोरखा डेमोक्रेटिक फ्रंट
- पीपल्स पार्टी
- प्रजातंत्र पार्टी ऑफ इंडिया
- सुराज सेवा दल
- उत्तराखंड जनशक्ति पार्टी
इन दलों की मान्यता रद्द होने से अब इन्हें जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धाराओं और आयकर अधिनियम के तहत मिलने वाले किसी भी लाभ का अधिकार नहीं रहेगा। #रद्ददल #उत्तराखंडपार्टियां #सूचीसेबाहर #राजनीति_खबरें