उत्तराखंड में इस वर्ष बाघों द्वारा मानवों पर किए गए हमले लेपर्ड हमलों से अधिक दर्ज हुए हैं। बाघों ने अब तक 12 लोगों की जान ली है, जबकि लेपर्ड हमलों में 8 मौतें हुईं। यह पिछले दशक के ट्रेंड से बिल्कुल उलट है, जहाँ आमतौर पर लेपर्ड हमले अधिक होते थे। विशेषज्ञों का कहना है कि बाघों की संख्या में वृद्धि और उनके वासस्थान के आसपास निर्माण कार्यों के चलते वे मानव क्षेत्रों के निकट आ रहे हैं।
यह बदलाव उत्तराखंड के वन-मानव सहअस्तित्व के लिए एक नई चुनौती है। जंगलों में सड़कों, जलाशयों और पर्यटन सुविधाओं के कारण बाघों के प्राकृतिक रास्तों में व्यवधान बढ़ा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अलग “टाइगर-कॉरिडोर” और समुदाय-आधारित संरक्षण नीति बनाना अब अनिवार्य हो गया है।